झील का कमल भी
आपके चेहरे की रंगत से शर्माए
आपके चेहरे की रंगत से शर्माए
आस्मां का नीला रंग भी
आपके आँखों के नीलेपन से शर्माए
आपके आँखों के नीलेपन से शर्माए
गुलाब की लाली भी
आपके होंठों की लाली से शर्माए
आपके होंठों की लाली से शर्माए
कस्तूरी की सुगंध भी
आपके बदन की सुगंध से शर्माय
आपके बदन की सुगंध से शर्माय
मोरनी की चाल भी
आपकी इतराती हुयी चाल से शर्माय
आपकी इतराती हुयी चाल से शर्माय
कोयल की मधुर आवाज भी
आपकी मीठी मनोहर आवाज से शर्माय
आपकी मीठी मनोहर आवाज से शर्माय
ये मल्लिके-हिन्द आपकी तारीफ़ में और क्या लिखू
नूर ये मोहब्बत के रूप को और क्या चिराग दर्शावु
नूर ये मोहब्बत के रूप को और क्या चिराग दर्शावु
ये कोई इश्क़ या प्रीत की कविता नहीं
ये तो अपनेदिल के लिए दिल से निकले शब्दों का बयां है
ये तो अपनेदिल के लिए दिल से निकले शब्दों का बयां है
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